मजदूरों की आवाज
उधर, देश में यूपी के
मजदूरों की घर वापसी और लॉकडाउन में हुई दुर्दशा को देखते हुए योगी सरकार ने घोषणा
कर दी कि किसी भी राज्य को अब यूपी के मजदूरों की सेवा लेने से पहले यूपी सरकार से
इसकी इजाजत लेनी होगी। यूपी सरकार के इस निर्णय के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर
मराठी और गैर मराठी राजनीति का दौर शुरू होता दिख रहा है। योगी के बयान के बाद
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ ने
ऐसा नियम बनाया है तो अब हम भी यह कहना चाहते हैं कि किसी भी मजदूर को महाराष्ट्र
आने से पहले अब हमारी सरकार, पुलिस और प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
ऐसा ना करने पर किसी को महाराष्ट्र में एंट्री नहीं मिलेगी। योगी आदित्यनाथ को
इसका ध्यान रखना चाहिए।
वहीं शिवसेना नेता
संजय राउत ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चाहते हैं कि राज्यों को
उनके प्रदेश के लोगों को रोजगार देने के लिए उनकी अनुमति लेनी चाहिए तो उन्हें यह
नहीं भूलना चाहिए कि प्रवासी मजदूर काम की तलाश में महाराष्ट्र आए थे। उन्होंने
कहा, 'हमने
उन्हें स्वीकार किया और उन्हें यहां काम करने दिया। हमने इन लोगों का ध्यान पिछले
एक-डेढ़ महीने में ही नहीं रखा...बल्कि वे वर्षों से यहां काम करते रहे हैं। हम सब
सौहार्द के साथ मिलकर रह रहे थे।
क्या इन सरकारों को ये पता है कि ऐसा करने से किस का नुकसान
होगा।
कुर्सी पर बैठ कर एसी रूम मे मीटींग कर के फैसला तो ले लिया
पर मजदूरों को रोजगार कहा से मिलेगा ।
क्या रोजगार देने पर भी कोई सरकार बात कर रही है। मजदूर गांव तो आ गया लेकीन यहा भी रोजगारे के नाम कर सिर्फ दावे है। अब योगी जी से उम्मीद की जा रही है की मजदूरों को उत्तर प्रदेश मे ही रोजगार देने का प्रयास करेगें। ताकी अब मजदूरो का अपना गांव ना छोणना पडे।
